बैंकों के कर्मचारियों द्वारा निजीकरण के ख़िलाफ़ किये जा रहे संघर्ष का विभिन्न क्षेत्रों के मज़दूरों ने समर्थन किया

सेवा में,

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स,

हम, अधोहस्ताक्षरित विभिन्न क्षेत्रों के मज़दूरों की यूनियनें, एसोसियेशनें और यूनियनों की फेडरेशनें तथा लोक संगठन, सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के ख़िलाफ़ आपके न्यायपूर्ण संघर्ष को अपना पूरा समर्थन देते हैं। 15 और 16 मार्च, 2021 को प्रस्तावित आपके अखिल भारतीय हड़ताल की पूर्ण सफलता की हम कामना करते हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण मज़दूर-विरोधी, जन-विरोधी और समाज-विरोधी क़दम है।

हम मज़दूरों ने बार-बार पाया है कि एक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई के निजीकरण से सैकड़ों मज़दूर अपनी नौकरियां खो देते हैं। निजीकरण के बाद ज्यादा से ज्यादा संख्या में मज़दूरों को ठेके पर रखा जाता है; इन मज़दूरों को नियमित मज़दूरों के मुकाबले में एक तिहाई से एक चैथाई कम वेतन पर काम कराया जाता है। निजीकरण के बाद, स्थायी और ठेका मज़दूरों, दोनों से ओवरटाइम का पैसा दिये बिना लंबे समय तक काम कराया जाता है। नए पूंजीवादी मालिकों द्वारा मौजूदा यूनियनों को नष्ट किया जाता है और नए मज़दूरों को खुद को संगठित करने की अनुमति नहीं दी जाती है। इस प्रकार, निजीकरण का मज़दूर-विरोधी क़दम पूरे मज़दूर वर्ग को कमज़ोर करता है।

बैंकों में जमा बचत की सुरक्षा, देश के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। निजी बैंकों जैसे इंडसइंड बैंक, पीएमसी बैंक आदि के साथ हाल में हुई समस्याओं ने पूरी तरह से लाभ-संचालित निजी बैंकों के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। दो बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का प्रस्तावित निजीकरण पूरी तरह से लोगों के हितों के खि़लाफ़ है।

निजीकरण समाज-विरोधी भी है। अब बैंक सामाजिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए नहीं बल्कि केवल निजी लाभ अर्जित करने के लिए चलाए जाएंगे। इस क्षेत्र में निजी बैंकों के प्रवेश करने के बाद, बैंकिंग सेवाएं बहुत अधिक महंगी हो गई हैं। बहुत से लोग जल्द ही इन सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

दशकों से सार्वजनिक धन का उपयोग करके और लाखों मज़दूरों के श्रम से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बनाए गए हैं। ये लोगों की संपत्ति हैं और इनका उपयोग मज़दूरों और अन्य सभी मेहनतकशों की ज़रूरतों को पूरा करने और उनके कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के साथ, केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के सभी उद्यमों पर एक युद्ध की घोषणा की है और हिन्दोस्तानी लोगों के धन से निर्मित क़ीमती संपत्ति को हिन्दोस्तानी और विदेशी, दोनों इजारेदारों को इसे सौंप देना चाहती है। हम सभी के केवल एकजुट संघर्ष ही हैं जो सरकार को रोक सकते हैं। साथ ही हम सभी को हमारे द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के निजीकरण की नीतियों के खि़लाफ़ हमारी लड़ाई में उपभोक्ताओं को शामिल होने के लिए एकजुट करना होगा। यह काम बैंक मज़दूर बहुत अच्छी तरह कर रहे हैं। मज़दूरों, किसानों और मेहनतकश लोगों का एकजुट मोर्चा हम सभी के लिए आगे बढ़ने का रास्ता है!

हम बैंकों के निजीकरण के दुष्प्रभावों के बारे में बैंकिंग सेवाओं के उपयोगकर्ताओं के बीच जागरुकता पैदा करने के आपके प्रयासों की सराहना करते हैं। हम भी अपने सदस्यों, उनके परिवारों और लोगों के बीच आपके जागरुकता अभियान को आगे बढ़ाएंगे क्योंकि वे सभी बैंकों के ग्राहक हैं। हम आपके नारे का समर्थन करते हैं कि “लोगों का धन, लोगों की खुशहाली के लिए” और हम आपके संघर्षों के साथ पूर्णतः एकजुट हैं। एक पर हमला सब पर हमला है!!

आपके साथ एकजुटता में,

  1. एयर इंडिया सर्विस इंजीनियर्स एसोसिएशन
  2. ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन
  3. ऑल इंडिया डिफेन्स इम्पलॉईज़ फेडरेशन
  4. ऑल इंडिया गार्ड्स काउन्सिल
  5. ऑल इंडिया इन्श्योरेंस इम्पलॉईज़ एसोसिएशन
  6. ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन
  7. ऑल इंडिया पोर्ट एंड डॉक वर्कर्स फेडरेशन
  8. ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन
  9. ऑल इंडिया रेल्वेमेन्स फेडरेशन
  10. ऑल इंडिया रेलवे इम्पलॉईज़ कॉनफेडरेशन
  11. ऑल इंडिया रेल ट्रैकमेन्टेनर्स यूनियन
  12. ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन
  13. ऑल इंडिया ट्रेन कंट्रोलर्स एसोसिएशन
  14. कोचीन रिफायनरी इम्पलॉईज़ एसोसिएशन
  15. जनरल इन्श्योरेंस इम्पलॉईज़ ऑल इंडिया एसोसिएशन
  16. हिंद खदान मजदूर फेडरेशन
  17. इंडियन रेलवे लोको रनिंगमेन ऑर्गनाइजेशन
  18. इंडिया रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ ऑर्गनाइजेशन
  19. कामगार एकता कमेटी
  20. लड़ाकू गारमेंट मज़दूर संघ
  21. नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे मेन
  22. पेट्रोलियम एंड गैस वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया
  23. पोर्ट, डॉक एंड वाटरफ्रंट वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया
  24. स्टील प्लांट इम्पलॉईज़यूनियन – राष्ट्रीय इस्पात निगम द्वारा मर्यादित
  25. वाटर ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया

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