हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की स्थापना की 40वीं वर्षगांठ पर उत्साहपूर्ण समारोह

25 दिसंबर, 2020 को कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की स्थापना को 40 साल पूरे हुए। कोविड-19 की महामारी को ध्यान में रखते हुए, पार्टी की केंद्रीय समिति ने इस महत्वपूर्ण अवसर को मनाने के लिए एक बड़े उत्सव का आयोजन नहीं करने का फैसला किया। इसकी बजाय देश के कई शहरों, जिलों और गांवों में और विदेशों में, पार्टी की क्षेत्रीय समीतियों ने इस अवसर को मनाने के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यक्रमों का आयोजन किया।

सरकार की मज़दूर-विरोधी और किसान-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ मज़दूरों और किसानों के अभूतपूर्व और एकजुट संघर्ष की पृष्ठभूमि में पार्टी की वर्षगांठ मनाई गयी। हर जगह की बैठकों में साथियों का उत्साह नज़र आ रहा था जो न केवल पिछले वर्ष, बल्कि दशकों से मज़दूर वर्ग और किसानों के बीच पार्टी को बनाने के लिए कड़ी मेहनत से काम करते आ रहे हैं। हर जगह बैठकों में पार्टी के साथियों ने उत्साहपूर्वक पार्टी की लाइन के सही होने में अपने विश्वास की पुष्टि की।

देशभर में बड़े पैमाने पर हो रहे मज़दूरों और किसानों के संघर्षों के महत्व पर इन सभाओं में चर्चा की गई। शासक वर्ग ने कोविड-19 की महामारी का फ़ायदा उठाते हुए, मज़दूर-विरोधी और किसान-विरोधी कानूनों के माध्यम से मज़दूरों के शोषण और किसानों की लूट को बेहद बढ़ा दिया है। लेकिन मज़दूरों और किसानों ने इन कानूनों को ठुकरा दिया है और अपने अधिकारों के संघर्ष को और आगे बढ़ा रहे हैं। लाखों किसान और मज़दूर अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं।

पूंजीपति वर्ग ने हमेशा ही मज़दूर वर्ग, किसानों और सभी शोषितों के बीच भ्रम पैदा किए हैं और आगे भी करता रहेगा ताकि मज़दूर-किसान अपनी चेतना के आधार पर अपने असली दुश्मन को न पहचान सकें। पूंजीपति वर्ग लोगों के बीच फूट डालने की पूरी कोशिश कर रहा है। लेकिन संघर्ष कर रहे किसानों और मज़दूरों ने हुक्मरानों के विभाजनकारी दांवपेंचो को ठुकरा दिया है और पूंजीपतियों के झूठ का बार-बार पर्दाफ़ाश कर रहे हैं।

यूनियन और पार्टी के आपसी मतभेदों और विभाजनों को दरकिनार करके मज़दूरों की यूनियनें एक सांझा बैनर के तले साथ आ रही हैं। देश के अलग-अलग इलाकों से किसानों का प्रतिनिधित्व कर रही सैकड़ों किसान यूनियनें एकजुट होकर संघर्ष कर रही हैं। मज़दूरों की ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के बीच आपसी समन्वय के साथ चलाये जा रहे संघर्षों में मज़दूर-किसान एकता साफ दिखाई दे रही है।

एक वर्ष पहले, देश के अलग-अलग शहरों और ग्रामीण इलाकों में लाखों की संख्या में छात्र, महिलाएं, युवक और मज़दूर, धर्म के आधार पर लोगों के बीच भेदभाव करने वाले सांप्रदायिक नागरिकता संशोधन अधिनियम (सी.ए.ए.) और उसके आधार पर नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर बनाने के प्रस्ताव के विरोध में खड़े हुए थे। हमारे देश के लोगों ने मजबूती के साथ प्रकट किया कि, हिन्दोस्तान हर एक हिन्दोतानी का है, चाहे उसकी धार्मिक मान्यता कुछ भी हो। अपने इन एकजुट संघर्षों से हमारे देश के लोगों ने हुक्मरानों को यह दिखा दिया कि हम बंटवारे की उनकी तमाम कोशिशों का कड़ा विरोध करते हैं।

सालगिरह की इन बैठकों में, पार्टी के साथियों ने इस बात पर चर्चा की कि हमारी आंखों के सामने हो रही घटनाएं और घटनाक्रम क्या दिखाते हैं। सभी बैठकों में उन्होंने एकमत से फैसला किया कि पूंजीपति वर्ग के राज की जगह पर मज़दूरों और किसानों का राज स्थापित करने के लिए मज़दूर वर्ग और किसानों को तैयार करने के लिए वह अपना पूरा दम लगाएंगे।

जोशीले हस्तक्षेपों के माध्यम से, कई साथियों ने पार्टी से जुड़ने के बाद से अपने वर्षों के अनुभव पर भी बात की। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि साथी कितनी कम उम्र का है या पार्टी में कितना नया है, हमारी पार्टी के सभी सदस्यों को खुलकर अपनी बातें रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हमारी पार्टी की हर एक इकाई में लगातार आलोचना और आत्म-आलोचना का पालन किया जाता है, ताकि हम हमारी कमियों की पहचान कर सकें, निडर होकर उनका सामना कर सकें और उन्हें सुधार सकें। ऐसा करते हुए हमने अपनी पार्टी को मजबूत, एकजुट और स्वस्थ बनाये रखा है।

साथियों के हस्तक्षेप के साथ-साथ क्रांतिकारी गाने और कविताएं भी पढ़ी गईं। मज़़दूर-किसान एकता ज़िंदाबाद के नारों के साथ सभाएं संपन्न हुईं।

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ज़िंदाबाद!

इंक़लाब ज़िंदाबाद!

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