एयर इंडिया के पायलटों ने अपने वेतन में कटौती का विरोध किया

एयर इंडिया के पायलटों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों, इंडियन पायलट्स गिल्ड (आई.पी.जी.) और इंडियन कमर्शियल पायलट एसोसिएशन (आई.सी.पी.ए.) ने इस बात पर प्रतिरोध किया है कि सरकार ने उनके वेतन में की गई काटौती का सिर्फ 5 प्रतिशत कम करने का प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि वेतन में कटौती को जल्दी से जल्दी वापस नहीं लिया गया तो वे हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे।

पायलटों की दोनों यूनियनों ने 24 दिसंबर, 2020 को एयर इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक को दिए गए एक संयुक्त पत्र में, छः महीने पहले वेतन में की गयी कटौती को केवल 5 प्रतिशत कम करने के प्रस्ताव के खि़लाफ़ अपनी अस्वीकृति से अवगत कराया है। यह वेतन कटौती एयर इंडिया की सहायक कंपनियों – एयर इंडिया एक्सप्रेस और एलायंस एयर के पायलटों पर भी लागू की गई थी।

पायलटों के वेतन में यह कटौती जुलाई 2020 में शुरू किए गए पायलटों के वेतन ढांचे में बदलाव का परिणाम था। इस नए वेतन ढांचे के द्वारा एयर इंडिया के पायलटों के वेतनों में 60 प्रतिशत की कटौती, (वेतन पर 40 प्रतिशत और उड़ान भत्ते पर 85 प्रतिशत की कमी की गयी थी) और एक छुट्टी-रहित वेतन नीति का ऐलान किया गया था। उड़ान भत्ते के अधिकांश भाग में कटौती लागू की गई थी जो कि वरिष्ठ पायलटों के कुल वेतन का 70 प्रतिशत है और कनिष्ठ पायलटों के कुल वेतन का लगभग 50 प्रतिशत बनता है। इसका मतलब यह है कि एक पायलट के सकल वेतन में औसतन 60-65 प्रतिशत की कमी की गयी है। एक पायलट के सकल वेतन में 3 घटक होते हैं – मूल वेतन, उड़ान भत्ता और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए दिया जाने वाला भत्ता। 25 मार्च, 2020 को लॉकडाउन की घोषणा हुई थी, जिसके बाद सभी व्यवसायिक उड़ानें रोक दी गई थीं, तब पायलटों को उनकी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिये मिलने वाले फरवरी और मार्च के भत्ते का भुगतान भी नहीं किया गया था।

पायलटों ने इस वेतन कटौती को अपने खि़लाफ़ हो रहे एक अन्याय के रूप में देखा है और इसलिए भी कि एयर इंडिया के शीर्ष प्रबंधन के वेतन में बहुत कम कटौती की गयी है। शीर्ष प्रबंधन के वेतन में सिर्फ कुछ भत्तों में कटौती की गयी है, जो कि उनके वेतन का केवल 20 प्रतिशत होता है और इसलिए उनके वेतन में कुल कटौती केवल 3-5 प्रतिशत की ही हुई है। एयरलाइन के पायलटों की मांग जायज़ है कि यह “कटौती” सभी कर्मचारियों के वेतनों में समान रूप से सांझा की जानी चाहिए। सितंबर में उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्री के साथ हुई मुलाक़ात में अपनी शिकायतों को पेश किया था, तब उनके साथ राहत का वादा किया गया था। नवंबर में उन्होंने मंत्री को फिर लिखा और उनके साथ एक और मुलाक़ात की मांग की, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। अक्तूबर तक अन्य विमान कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के वेतनों में हुई कटौती को वापस लेना शुरू कर दिया, जबकि एयर इंडिया के पायलटों को एक और कटौती का सामना करना पड़ा, जिससे उनके सकल वेतन में 70 प्रतिशत तक की कटौती हो गई।

पायलटों ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान की कठिन परिस्थितियों में वे देश के लिए अपने कर्तव्य को पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा कर रहे थे। वे न केवल विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए, वंदे भारत मिशन के लिये उड़ानें भर रहे थे, बल्कि आवश्यक निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई) और दवाओं को भी अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाने का काम कर रहे थे। उन्होंने यह सब काम पूरी लगन के साथ किया, जबकि कोविड से संक्रमित होने का ख़तरा हमेशा उनके सामने मंडरा रहा था और संक्रमित होने पर उन्हें बिना वेतन के, ड्यूटी पर न नियुक्त किये जाने के जोखिम का सामना भी करना पड़ा।

कोविड-19 के दुष्प्रभाव के रूप में, लंबे समय तक फेफड़ों की क्षति, न्यूरोलॉजिकल या हृदय की क्षति का मतलब, उनके लिए अपनी आजीविका का नुकसान था। वास्तव में इस दौरान की गई जांचों में 171 पायलटों को कोविड से संक्रमित पाया गया था। इसके बावजूद अन्य पायलट जो रोग से प्रभावित नहीं हुए थे, उन्होंने अधिक समय तक काम किया और महामारी के दौरान सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए बहुत से कष्ट सहे।

सकल वेतन में की गई कटौती को समाप्त करने और वेतन के पर्याप्त हिस्से की बहाली करने के अपने अधिकार के लिए लड़ने के अपने इरादे पर सभी पायलट दृढ़ता से डटे हैं।

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