किसान-विरोधी कानूनों के खिलाफ़ लोक राज संगठन द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी

राजस्थान के रामगढ़ की कुम्हार धर्मशाला में 23 दिसंबर को किसान दिवस के अवसर पर, केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में लोक राज संगठन द्वारा किसान सभा का आयोजन किया गया। इसमें दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलित 35 किसान शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद, किसानों की दशा और दिशा पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।

विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा हाल में पारित तीनों किसान-विरोधी कानूनों की कड़ी निंदा की। उन्होंने समझाया कि अंग्रेज़ों से आज़ादी पाने के बाद जो भी सरकार सत्ता में आयी है, वह बड़े- बड़े इजारेदार पूंजीपतियों के हितों के लिए और किसानों के हितों के खिलाफ़ काम करती आयी है। इसलिए किसानों की दशा नहीं सुधरी है। अनेक प्रकार की समितियां गठित की गयीं परंतु किसान के नाम पर कारपोरेट घरानों की तिजोरी भरने का काम ही होता रहा है क्योंकि राज्य सत्ता में बैठे लोग इस सरमायदारी व्यवस्था की ही सेवा करते रहे। आम लोगों के लिए राज्य सत्ता में कोई स्थान नहीं है।

विचार गोष्ठी में, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा पूरे हिन्दोस्तान में की गई अपील के आधार पर, 1 दिन का उपवास रखा गया। गोष्ठी में फैसला किया गया कि किसान संघर्ष समन्वय समिति की, 27 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के अवसर पर विरोध प्रकट करने की अपील के अनुसार, काली पट्टियां बांधी जायें और थालियाँ बजायी जायें। विचार गोष्ठी के समापन के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि तीनों किसान-विरोधी कानूनों तथा संशोधित बिजली विधेयक का डटकर विरोध किया जाए और तात्कालिक मांगों के संघर्षों में लोगों को ज्यादा से ज्यादा भाग लेने की अपील की जाए। इन संघर्षों में जनमानस की वर्ग चेतना विकसित करने की कोशिश की जाये ताकि सरमायदारी व्यवस्था को चुनौती दी जा सके।

विचार गोष्ठी के सहभागियों ने 27 दिसंबर के बाद दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर जाकर आन्दोलनकारी किसानों से बातचीत करने और उनके संघर्ष के लिए समर्थन प्रकट करने का भी निर्णय लिया।

विचार गोष्ठी को संबोधित करने वाले वक्ताओं में प्रमुख थे लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा, डॉक्टर कृष्ण नोखवाल, मनीराम लकेसर, ओम सांगर, ओम साहू, पूर्व सरपंच शैलेंद्र कुमार, दयाराम ढील, खेताराम सिंगाठिया, राममूर्ति स्वामी, नरेश सांगर, आदि।

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