ग़दरियों की पुकार – इंक़लाब

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संशोधित संस्करण, फरवरी 2018

उत्तरी अमरीका में निवासी हिन्दोस्तानी आप्रवासियों द्वारा गठित हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी ने 1915-16 में, एक क्रांतिकारी विद्रोह आयोजित किया था, जिसने बर्तानवी साम्राज्य को झकझोर दिया था। हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी से हिन्दोस्तानी क्रांतिकारियों की कई पीढ़ियां प्रेरित हुई हैं। 1920 के दशक में तथा उसके बाद आने वाले दशकों में शहीद भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारी भी उसी से प्रेरित हुए थे। 1960 और 1970 के दशकों में, उसी से कम्युनिस्टों को हिन्दोस्तानी आप्रवासियों को हिन्दोस्तानी क्रांति के समर्थन में और नस्लवादी हमलों के खिलाफ़ संगठित करने की प्रेरणा मिली। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी और वे सभी जो हिन्दोस्तानी समाज को हर प्रकार के शोषण और गुलामी से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं,आज भी हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी से प्रेरणा और मार्गदर्शन लेते हैं।

हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी की स्थापना की शताब्दी 2013 में हिन्दोस्तान के अनेक भागों में तथा विदेश में मनायी गई। सभी हिन्दोस्तानी कम्युनिस्टों ने इन समारोहों में भाग लिया। इस बात पर ध्यान देना आवश्यक है कि कम्युनिस्ट आंदोलन के अंदर एक धड़ा है जो उस सरकारी विवरण के साथ समझौता करता है, जिसके अनुसार यह कहा जाता है कि ग़दर पार्टी और कांग्रेस पार्टी, दोनों का एक ही लक्ष्य था, सिर्फ तौर-तरीके अलग थे। ग़दरियों को आतंकवादी करार दिये जाने की लाइन के साथ भी कुछ लोग समझौता कर लेते हैं।

कुछ हिन्दोस्तानी माक्र्सवादी विद्वानों ने यह धारणा फैलायी है कि ग़दरी बहुत बहादुर थे, परंतु उनके विचार बहुत नादान थे। उन विद्वानों के अनुसार, हिन्दोस्तानी क्रांति के सिद्धांत और कार्यक्रम को तय करने के लिए, हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी से सीखने को कुछ भी नहीं है। ऐसे विचार सिर्फ गलत ही नहीं, बल्कि बहुत हानिकारक भी हैं।

हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी, हिन्दोस्तानी लोगों की पहली ऐसी राजनीतिक पार्टी थी, जो मज़दूरों और किसानों को सत्ता में लाने पर वचनबद्ध थी। वह कांग्रेस पार्टी और मुस्लिम लीग जैसी, बर्तानवी शासकों के सौजन्य से गठित पार्टियों से बिल्कुल अलग थी। कांग्रेस पार्टी और मुस्लिम लीग जैसी पार्टियों ने पूंजीपतियों और जमींदारों को सत्ता में लाने के लिए काम किया, ताकि उपनिवेशवादी लूट की शासन व्यवस्था को बरकरार रखा जा सके।

यह हमारा दृढ़ विश्वास है कि हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी और उसके रास्ते पर चलने वालों के कार्यों का गंभीरता से अध्ययन करना आज के प्रत्येक हिन्दोस्तानी क्रांतिकारी की राजनीतिक शिक्षा का एक अत्यावश्यक भाग है। कम्युनिस्टों की वर्तमान पीढ़ी को इस बात को मानना होगा कि बीती पीढ़ियों के हिन्दोस्तानी क्रांतिकारियों और उनके द्वारा हमें सौंपी गई विचार-सामग्री एक ऐसी विरासत है, जिसके बल पर हमें और आगे बढ़ना होगा।

बीते समय की हर मुख्य क्रांतिकारी घटना, उसकी वजह से होने वाले भौतिक परिवर्तन, उससे उत्पन्न होने वाले सोच-विचार, आदि का विश्लेषण हिन्दोस्तानी क्रांतिकारी सिद्धांत को विकसित करने के लिए अत्यावश्यक है। उपनिवेशवाद की संपूर्ण विरासत, पूंजीवाद, सामंती अवशेष और साम्राज्यवाद को चकनाचूर करने के संघर्ष में जीत हासिल करने के लिये हिन्दोस्तानी क्रांति के सिद्धांत का विस्तारपूर्वक वर्णन अत्यावश्यक है।

यह पुस्तक उन बहादुर और सूझबूझवान लोगों को समर्पित है, जिन्होंने हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी की स्थापना की थी। यह पुस्तक उन सभी को समर्पित है जो उसके बाद हिन्दोस्तानी समाज की मुक्ति के लक्ष्य और आंदोलन को जागृत रखने के लिए योगदान देते रहे हैं। हिन्दोस्तान की धरती पर क्रांति की जीत सुनिश्चित करने के लिए, ग़दरियों की नयी पीढ़ियों का पोषण करना इस पुस्तक का उद्देश्य है।

इंक़लाब ज़िन्दाबाद!

लाल सिंह
महासचिव
हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी

 

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