कृषि अध्यादेशों के खि़लाफ़ उठे हरियाणा के किसान

10 सितम्बर, 2020 को हरियाणा के किसानों ने केन्द्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित, कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन अध्यादेशों का विरोध करने के लिए कुरुक्षेत्र में ‘किसान बचाओ, मंडी बचाओ’ के नारे के तहत महारैली की।

इस महारैली को भारतीय किसान यूनियन सहित हरियाणा के 17 किसान संगठनों ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। इस महारैली में किसानों, आढ़तियों और मंडी में काम करने वाले मज़दूरों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन अध्यादेशों – कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश-2020, मूल्य का आश्वासन और कृषि सेवा पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता अध्यादेश-2020 और अनिवार्य वस्तुएं (संशोधन) अध्यादेश-2020 को पारित किया था। इन अध्यादेशों को वापस लेने की मांग को लेकर पूरे देश में किसान बीते दो महीनों से संघर्ष कर रहे हैं। हरियाणा के किसानों का यह विरोध प्रदर्शन भी इसी संघर्ष का हिस्सा था।

इस महारैली में किसानों को हिस्सा लेने से जबरन रोकने के लिए हरियाणा भर में राज्य ने दमन का रास्ता अपनाया था। हजारों की संख्या में किसानों को गिरफ़्तार किया गया। हजारों वाहनों को जब्त किया गया। महारैली को प्रतिबंधित करके और सी.आर.पी.सी. की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगाकर कुरुक्षेत्र, पिपली मंडी और इसके आसपास के इलाकों को पुलिस ने पूरी तरह से बंद कर दिया।

साथ ही, प्रदेश के अन्य जिलों से किसानों को महारैली में शामिल होने से रोकने के लिए सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, रोहतक सहित अन्य जिलों में ”नशा और अवैध हथियार चैकिंग“ अभियान के नाम पर स्पेशल नाकेबंदी की गई।

आंदोलित किसानों को महारैली के स्थान तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने उनकी बसों और ट्रकों को रोक दिया। गुस्साए किसानों ने कहीं-कहीं तो पुलिस थानों और टोल नाकों के आगे ही धरना दिया।

किसान बसों के ज़रिए कुरुक्षेत्र जाने के लिए, जैसे ही निकले घेराबंदी करके उन्हें मौके पर ही जबरन रोक लिया गया। सिरसा से किसानों को लेकर जाने वाली बसों को जबरन रोक दिया गया। किसानों ने बसों से उतरकर, डबवाली क्षेत्र में खुइयां टोल टैक्स के पास ही धरना देकर प्रदर्शन किया। किसानों के समर्थन में सिरसा अनाजमंडी के मज़दूरों और आढ़तियों ने हड़ताल की। कुरुक्षेत्र जाने के लिए निकलने ही पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया। इन्होंने पुलिस थाने के अंदर ही प्रदर्शन शुरू कर किया।

फतेहाबाद अनाज मंडी से निकले किसानों, आढ़तियों और मंडी कर्मियों को उनके वाहनों के साथ रोक दिया गया।

रोहतक अनाज मंडी से किसानों, आढ़तियों और मुनीमों को लेकर आयी लगभग 25 गाड़ियों को रैली से दो किलोमीटर दूर रोक दिया गया। वे 2 किलोमीटर पैदल चलकर रैली में शामिल हुए।

किसान नेताओं के घरों और उनके कार्यालयों पर छापा मारकर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। कहीं-कहीं उन्हें नज़रबंद कर दिया गया।

केन्द्र और राज्य सरकार के इस दमनकारी रुख़ के बावजूद ‘किसान बचाओ, मंडी बचाओ’ महारैली के लिये हजारों की संख्या में किसान पिपली अनाज मंडी में पहुंचे। कुरुक्षेत्र शहर में दयालपुर चैराहे पर लगाए गए पुलिस बैरियर को हटाकर ट्रैक्टर और अन्य वाहनों पर सवार किसानों ने पिपली चैक की ओर प्रस्थान किया। पुलिस ने वहां लाठी चार्ज किया। कई किसान घायल हो गए। परन्तु किसान रैली स्थल पर जाने की बात पर अड़े रहे और हजारों की तादाद में रैली में पहुंचे।

किसानों ने केंद्र सरकार से तीन अध्यादेशों को वापस लेने की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने मांग की कि संसद में ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून’ पास किया जाये और न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत का कम से कम डेढ़ गुना हो। उन्होंने मांग की कि न्यूनतम समर्थन मूल्य न देना एक दंडनीय अपराध घोषित किया जाये और सभी किसानों के कर्ज़ो को माफ किया जाए। उन्होंने मांग की कि किसानों को आढ़तियों के मार्फत ही भुगतान हो, जैसा कि अब तक होता रहा है, ताकि बैंक कर्ज़ा वसूली के नाम पर किसानों को न लूट सकें।

भारतीय किसान यूनियन और दूसरे सहभागी संगठनों ने ऐलान किया है कि वे 13 सितम्बर को गोष्ठी करके आगे की योजना को तय करेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इन मांगों की सुनवाई नहीं होती तो वे 20 सितम्बर से अपना आन्दोलन और तेज़ करेंगे।

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