अधिकारों की हिफ़ाज़त में संघर्ष

बिहार में स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल

23 अगस्त को बिहार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन.एच.एम.) के तहत कार्यरत लगभग 20,000 पैरामेडिकल कर्मचारियों ने पटना के एम्स और राज्य द्वारा संचालित अन्य मेडिकल कॉलेजों से जुड़े जूनियर डॉक्टरों के साथ हड़ताल की। हड़ताल कर रहे कर्मचारी अपने वेतन में वृद्धि की मांग कर रहे थे जो काफी समय से बकाया है। उन्होंने बीमा और भविष्य निधि जैसी सामाजिक सुरक्षा के सुविधाओं की भी मांग की।

बिहार स्टेट कांट्रेक्चुअल हेल्थ एम्प्लाइज फेडरेशन के सचिव ने कहा कि ”2011 से हमारे वेतन नहीं बढ़े हैं। इसके अलावा हमारे पास जीवन बीमा भी नहीं है। राज्य सरकार द्वारा कोविड-19 की ड्यूटी कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को मिलनेवाले एक महीने के वेतन के भत्ते से भी हमें वंचित रखा गया है। कर्मचारी भविष्य निधि की मांग हमारी 17 सूत्रीय मांगों में से एक है।”

जूनियर डॉक्टर अपने वेतन में बढ़ोतरी और पोस्ट-ग्रेजुएट डॉक्टरों से सम्बंधित सरकारी बॉन्ड के नियम में छूट की की मांग कर रहे हैं।

एम्स-पटना के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि, “सरकार और अधिकारियों को राज्य के डॉक्टरों और निवासियों की सभी वास्तविक चिंताओं को सुनना और हल करना होगा। सभी स्वास्थ्य कर्मी बिना थके कोविड-19 के समय में दिन-रात काम कर रहे हैं। हम कभी भी अपने काम से पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि हम मरीजों के जीवन के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन अगर हमारी वास्तविक चिंताओं को कोई नहीं सुनेगा तो हम कहां जाएंगे?”

पिछले दो सप्ताह से केरल में जूनियर नर्स हड़ताल पर

राज्य भर में सरकारी स्वस्थ्य कॉलेज अस्पताल (एमसीएच) की जूनियर नर्सें 21 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। वे अपने वेतन में वृद्धि की मांग कर रहे हैं ताकि उनका वेतन अन्य स्टाफ नर्सों के बराबर हो जाए।

जूनियर नर्स, जिन्होंने बीएससी नर्सिंग पूरी कर ली है और केरल नर्स एंड मिडवाइव्स काउंसिल के तहत पंजीकृत हैं, को एक साल की ड्यूटी पर एमसीएच में तैनात किया गया था। उनका वेतन 2011 में 6,000 रुपयों से बढ़ाकर 13,900 रुपये कर दिया था ताकि उनका वेतन स्टाफ नर्सों के बराबर हो जाए। हालांकि, उन्हें संशोधित वेतन 2016 से मिलना शुरू हुआ। उस वर्ष स्टाफ नर्सों का वेतन बढ़ाकर 27,800 रुपये कर दिया गया था। कंपल्सरी नर्सिंग सर्विस स्टाफ एसोसिएशन के सचिव ने कहा कि, ”हम एक वर्ष से भी ज्यादा समय से वेतन में वृद्धि की मांग कर रहे हैं, लेकिन बदले में हमें सिर्फ वादे मिले हैं। सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के मुताबिक 200 बेड्स से ज्यादा वाले अस्पताल में काम कर रही पंजीकृत नर्सों को स्थायी कमर्चारियों जितना ही वेतन मिलना चाहिए।“

एक इंटर्न नर्स ने कहा कि, “हम अपनी अनिवार्य इंटर्नशिप कर रहे हैं। लेकिन इस समय हम सबसे आगे भी हैं। हम कोविड आईसीयू, कोविड कक्ष और संक्रमण कक्षों में ड्यूटी पर हैं। लेकिन हमें दिन का केवल 450 रुपये का भुगतान ही मिलता है। हम हमारे किये गए काम के लिए भुगतान में समानता चाहते हैं।“

एक और 22 वर्षीय जूनियर नर्स ने कहा कि, ”हम 6 घंटे तक पीपीइ किट पहन कर काम करते हैं। हम कोविड के मरीजों का ध्यान रखते हैं, हम उनको अन्य समस्यों में मदद सहित मानसिक मदद भी देते हैं। ये हमारा काम है और हम उसे मानते हैं, लेकिन हमने अधिकारियों से कई बार अन्य नर्सों की तरह हमें काम के बराबर वेतन देने के लिए कहा है।“

हड़ताल को शुरू हुये दो हफ्ते हो चुके हैं और अब तक सरकार ने हड़ताल कर रही नर्सों की मांगों का कोई जवाब नहीं दिया है। बल्कि हड़ताल कर रही नर्सों को धमकी दी गई है कि अगर वे काम पर नहीं लौटते तो उनका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा और उन्हें हॉस्टल भी खली करने को कहा जाएगा। सरकार ने अंतिम वर्ष में पढ़ रहे बीएससी नर्सिंग के छात्रों से हड़ताल कर रहे नर्सों का काम करवाने की कोशिश की थी। लेकिन इस सब के बावजूद नर्सों ने बिना डरे अपनी हड़ताल को जारी रखा हैं।

कर्नाटक के स्वास्थ्य कर्मियों ने कम वेतन और सुविधाओं की कमी का विरोध किया

13 अगस्त को कर्नाटक के बेलगावी में चिकित्सा विज्ञान संस्थान के नर्सों और अन्य मज़दूरों ने अपना विरोध प्रदर्शन करने के लिए काम की जगहों पर काले पट्टे पहने। वे कम वेतन, खराब कामकाजी सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा लाभों की कमी के खि़लाफ़ विरोध कर रहे थे।  रिक्त स्थानों को भरने तथा सभी अस्थायी कर्मचारियों के लिए स्थायी नौकरियां और काम के बेहतर हालातों और सुविधाओं की भी उन्होंने मांग की। उन्होंने स्वस्थ्य बीमा, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति के लाभों जैसी सुविधाओं की मांग की।

बीआईएमएस वर्कर्स एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि, ”हम हर स्तर पर 30 प्रतिशत से ज्यादा रिक्त पदों के साथ काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, तीन कक्षों के लिए एक ही टेक्नीशियन और 100 बेड्स के लिए केवल एक नर्स है। स्वीकृत रिक्त पदों पर भर्ती करके इस बोझ को कम किया जाना चाहिए।” उन्होंने बताया की काम के हालात असहनीय हैं।

अधिकांश सहायक कर्मचारी, अटेंडर, पैरा-मेडिकल और टेक्नीशियन और नर्स अस्थायी अनुबंध पर काम कर रहे हैं। उनकी नौकरियों को नियमित करने की मांग लंबे समय से चली आ रही है।

दो महीने के बकाया वेतन की मांग को लेकर तिरुपुर में सफाई कर्मी हड़ताल पर
तिरुपुर में सफाई कर्मचारियों ने जोनल कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया

तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में सफाई कर्मचारियों ने दो महीनों के अपने बकाया वेतन के तत्काल भुगतान की मांग को लेकर 25 अगस्त को जोनल कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। तीन निगमों में 40 वार्डों के लगभग 300 सफाई कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।

उन्होंने बताया कि वे कोविड-19 के संकट में लगातार बिना छुट्टियां लिए काम कर रहे हैं। हड़ताल कर रहे मज़दूरों ने बताया कि 500 से ज्यादा ठेका मज़दूरों को जुलाई में वेतन नहीं दिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार मांग करने के बाद भी हमें सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए।

उन्होंने बताया कि वर्तमान के इस संकट में उन्हें कितनी परेशानियां हो रही हैं और उनकी आजीविका पर भी बहुत ही बुरा असर पड़ा है। बहुत से मज़दूर 7 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं, लेकिन वे अभी भी ठेका मज़दूर ही हैं।

मैसूरु में मिड-डे मील मज़दूरों ने वेतन के भुगतान में देरी का विरोध किया
मिड-डे मील कर्मचारियों का मैसूरु में जिला प्रशासन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

20 अगस्त को स्कूल के मिड-डे मील कर्मचारियों ने लॉकडाउन के दौरान नहीं दिए गए वेतन के भुगतान की मांग करते हुए मैसूरु में जिला प्रशासन कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। मज़दूरों ने बताया की सरकार ने उन्हें पिछले 5 महीनों से वेतन नहीं दिया है। हड़ताल को अखिल भारतीय यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (ए.आई.यू.टी.यू.सी.) और कर्नाटक राज्यसुख अक्षरा दशोरा कर्मकार संघ के बैनर तले आयोजित किया गया था।

हड़ताल कर रहे मज़दूरों ने बताया की वे गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं और इस लॉकडाउन के समय में वेतन न मिलने की वजह से अपने परिवारों की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने नारे लगाए और अपने बकाया वेतन का तुरंत भुगतान करने की सरकार से मांग की। अन्य मांगों में स्कूल खुलने तक वेतन का भुगतान और राशन किट का वितरण शामिल है।

पश्चिम बंगाल के चाय बागान मज़दूर हड़ताल पर

दार्जीलिंग के कुर्सियोंग उपमंडल के 506 एकड़ ज़मीन पर फैले लोंगव्यू चाय बागान के 1,252 से भी अधिक मज़दूरों ने 19 अगस्त से हड़ताल शुरू कर दी है। उनकी मांग है कि पिछले वर्ष के बोनस के साथ उनकी बकाया राशि का तुरंत भुगतान किया जाये। मज़दूरों ने भविष्य निधि व त्यौहार के बोनस की भी मांग रखी है। इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय, प्रबंधन ने मज़दूरों की ”अराजकता“ को समस्या बताते हुए, 21 मार्च से चाय बागान में काम बंद कर दिया।

लोंगव्यू चाय बागान के मज़दूरों के विरोध प्रदर्शन से प्रेरित होकर कोहिनूर, रहीमाबाद और नया सैली जैसे अन्य चाय बागानों के मज़दूरों ने भी बकाया बोनस व अन्य सुविधाओं की मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किये।

निजीकरण के खि़लाफ़ गुजरात के रेल मज़दूरों ने विरोध प्रदर्शन किया
निजीकरण के खि़लाफ़ वदोदरा में रेल मज़दूरों का प्रदर्शन

25 अगस्त को गुजरात के रेल मज़दूरों ने वडोधरा शहर के प्रतापगढ़ में स्थित मंडल रेलवे प्रबंधन के दफ्तर के सामने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को वेस्टर्न रेलवे मज़दूर संघ और वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन द्वारा आयोजित किया गया था।

रेल मज़दूरों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • 151 मेल रेलगाड़ियों और 23 रेलवे सेवाओं का निजीकरण रोकें
  • इंजन चालकों व यातायात रनिंग कर्मचारियों के लाइन बॉक्सों को खतम करने के प्रबंधन के फैसले को वापस लें
  • पुरानी पेंशन योजना लागू करो
  • रात की ड्यूटी के काम पर समय सीमा निर्धारित की जाए
  • 30 वर्ष नौकरी करने के बाद या 55 वर्ष की उम्र होने पर कर्मचारियों की जबरदस्ती सेवा निवृत्ति पर रोक लगे
  • सभी रेलवे मज़दूरों को 20 लाख रुपयों की महामारी सहायता दी जाये
निजीकरण के ख़िलाफ़ पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के मज़़दूरों का बहादुर प्रदर्शन

18 अगस्त को लगभग 15 लाख बिजली कर्मचारियों ने भारत सरकार के बिजली (संशोधन) विधेयक-2020 में प्रस्तावित ”कर्मचारी-विरोधी“ और ”उपभोक्ता-विरोधी“ संशोधन के ख़िलाफ़ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किये। प्रदर्शनकारियों ने समझाया कि सरकार इन संशोधनों का उपयोग बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का निजीकरण करने के लिए कर रही है। उन्होंने मांग की कि इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

एपी पावर एम्प्लॉइज ज्वाइंट एक्शन के सदस्यों ने कहा कि, “बिजली (संशोधन) विधेयक-2020 किसान विरोधी है। यह घाटे के राष्ट्रीयकरण और मुनाफे़ के निजीकरण के अलावा कुछ भी नहीं है।“

बिल के विरोध में जुलाई के महीने में विरोध प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद बिजली मंत्रालय ने विधेयक को संशोधित करने का वादा किया था। लेकिन उस वादे का उल्लंघन करते हुए, हिन्दोस्तानी सरकार बिजली वितरण के निजीकरण की अपनी योजना को आगे बढ़ा रही है। इसके विरोध को व्यक्त करने के लिए नेशनल कोआर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज एंड इंजिनीयर्स (एन.सी.सी.ओ.ई.ई.ई.) द्वारा 18 अगस्त को “राष्ट्रीय विरोध दिवस” मनाने का आह्वान किया गया था।

प्रदर्शनकारियों ने समझाया कि निजीकरण की शुरुआत हो चुकी है। ओडिशा राज्य सरकार ने पहले ही केंद्रीय विद्युत आपूर्ति उपक्रम (सी.ई.एस.यू.) को टाटा पावर को सौंप दिया है और तीन अन्य डिस्कॉम्स-एन.ई.एस.सी.ओ., डब्ल्यू.ई.एस.सी.ओ. और साउथेको का निजीकरण करने की योजना बनाई है।

पंजाब में पिछले कुछ हफ्तों में अलग-अलग क्षेत्रों के सरकारी कर्मचारियों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए गए

14 अगस्त को पंजाब राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के मज़दूरों ने नौकरी, वेतन और भत्तों में कटौती को लेकर राज्य भर में विरोध प्रदर्शन किए। वे महंगाई भत्ते के भुगतान में चार साल की देरी, कम वेतन पर नए कर्मचारियों की भर्ती, मोबाइल भत्तों को घटाकर आधा करने, खाली पदों को भरने के बजाय उन्हें खारिज करने आदि का विरोध कर रहे थे।

पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पी.एस.पी.सी.एल.) और पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पी.एस.टी.सी.एल.) के मज़दूरों ने मंडी, अहमदगढ़ और पोहरी रोड में विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारी मज़दूरों ने सरकार के 40,000 रिक्त पदों को ख़ारिज करने के फैसले को रद्द करने की मांग की। पी.एस.पी.सी.एल. में पदों की स्वीकृत संख्या 75,757 है और पिछले कुछ वर्षों से 40,483 पद खाली पड़े हैं। सरकार ने इन रिक्त पदों को भरने पर ध्यान लगाने के बजाय नौकरी के पदों में कटौती करने का फैसला किया।

पंजाब सबोर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन (पी.एस.एस.एफ.) के सदस्यों ने अपने महंगाई भत्ते की किस्तों का भुगतान नहीं करने के लिए राज्य सरकार की निंदा करते हुए एक विरोध प्रदर्शन किया।

कर्नाटक में शिक्षकों द्वारा राहत पैकेज की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन

स्कूल शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों ने राज्य सरकार से राहत पैकेज की मांग को लेकर 19 अगस्त को बेंगलुरु में विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने बताया कि किस तरह सरकार अनएडेड (सरकारी सहायता रहित) स्कूल शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों के लिए विशेष पैकेज की मांग को अनसुना कर रही है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने 1025 करोड़ रुपये की आरटीई प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं किया है। यह भी बताया गया कि मार्च में भर्ती किए गए शिक्षकों की नियुक्तियों को रोक दिया गया है। शिक्षकों ने बताया कि कुछ स्कूलों में वेतन में कटौती की गई है, ये कहते हुए की अभिभावक फीस का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। जबकि सरकार ने अप्रैल 2021 तक के वेतन भुगतान का वादा किया था, इस मुद्दे पर कोई ठोस क़दम नहीं उठाए गए हैं। इसके विपरीत कुछ स्कूलों में शिक्षकों के वेतन में कटौती हुई है।

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