ग़दर इंटरनेशनल और इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन की प्रेस विज्ञप्ति

8 अक्तूबर, 2020

पंजाब और देशभर में किसानों के संघर्ष के समर्थन में इंग्लैंड के साउथ हॉल में रविवार 4 अक्तूबर को एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन का आयोजन गुरु सिंह सभा साउथ हॉल ने किया था और समाज के अलग-अलग तबकों के लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन और ग़दर इंटरनेशनल ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया और अपनी एकजुटता जताई।

हेवलॉक रोड पर स्थित गुरु सिंह सभा से विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई और अंत में साउथ हॉल टाउन हॉल पर लोग इकट्ठा हुए। कार, वैन, ट्रक और पैदल चलते हुए सैकड़ों लोगों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जोशपूर्ण नारे लगाये – किसान-मज़दूर एकता ज़िदाबाद, शहीद भगत सिंह ज़िंदाबाद!, इंक़लाब ज़िंदाबाद! उन्होंने हिन्दोस्तान की सरकार द्वारा पारित किसान-विरोधी और समाज-विरोधी कानूनों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने पंजाब और देशभर में कृषि उत्पादों के व्यापार और भंडारण से संबंधित तीन विधेयकों का विरोध कर रहे किसानों के साथ एकजुटता प्रकट की। ये तीन विधेयक हैं – किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020; मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर किसानों के साथ समझौते (सशक्तिकरण और संरक्षण) विधेयक, 2020; और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक। किसान इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) विधेयक 2020, का भी विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इस बिल से किसानों का बिजली पर खर्चा और भी बढ़ जायेगा।

इन कानूनों के विरोध में सड़कों पर उतरे किसान इस बात से बेहद नाराज़ हैं कि सरकार ने इन तीनों विधेयकों को सभी हलकों से जबरदस्त विरोध के बावजूद बेहद जल्दबाजी में संसद में पारित कर दिया। पंजाब के किसानों ने 23-25 सितम्बर के बीच तीन-दिवसीय रास्ता-रोको आंदोलन चलाया। 25 सितंबर को देश-व्यापी बंद का आयोजन किया गया। 250 किसान संगठनों के गठबंधन आल इंडिया किसान संघर्ष कॉअर्डिनेसन कमेटी (ए.आई.के.एस.सी.सी.) ने देश के राष्ट्रपति से इस बिल को संसद में वापस भेजने की मांग की है।

ग़दर इंटरनेशनल, इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने रैली को संबोधित किया। ग़दर इंटरनेशनल के सलविंदर ढिल्लों ने कहा कि हिन्दोस्तानी राज्य द्वारा इन विधेयकों को संसद में बगैर किसी चर्चा के पारित करना यह दिखाता है कि हिन्दोस्तान में असली जनतंत्र नहीं है। पंजाब और देशभर के किसान पहले से ही बढ़ते कर्ज़ से जूझ रहे हैं और सैकड़ों की तादाद में आत्महत्या करने को मजबूर हैं। अब कृषि उत्पादों के व्यापार को देशी और विदेश के इजारेदार पूंजीपतियों के हाथों में देकर हिन्दोस्तानी राज्य उन्हें उनके जीने के साधन से भी वंचित करने जा रहा है। इजारेदार पूंजीवादी कंपनियों के लिए अधिकतम मुनाफ़े बनाने की क़ीमत किसानों को चुकानी पड़ेगी। इन कानूनों के चलते किसान ग़रीबी और बर्बादी की ओर धकेले जायेंगे। हिन्दोस्तानी राज्य मज़दूरों, ट्रेड यूनियनों, छात्रों और महिलाओं पर भी हमले कर रहा है। किसानों, छात्रों और सभी मेहनतकशों को एकजुट होकर एक ऐसी राज्य व्यवस्था की स्थापना करनी चाहिए जो किसानों और सभी दबे-कुचले लोगों के हाथों में सत्ता देगी, जहां वे खुद अपनी तक़दीर में मालिक होंगे। अर्थव्यवस्था को उनकी ज़रूरत पूरी करने की दिशा में चलाया जाना चाहिए और न कि सरमायदारों की। देश के मेहनतकशों की मेहनत और संसाधन को टाटा, बिरला, अंबानी को अमीर बनाने के लिए नहीं बल्कि देश के मज़दूरों, किसानों और सभी मेहनतकशों की ज़िन्दगी को सुधारने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हम एक ऐसे हिन्दोस्तान के लिए संघर्ष कर रहे हैं जहां शहीद भगत सिंह और अन्य शहीदों का सपना पूरा होगा। आज वक्त आ गया है कि हम सभी किसानों के साथ खड़े रहें, जो इन विधेयकों का विरोध कर रहे हैं और उन्हें वापस करने की मांग कर रहे हैं। यह बड़े शर्म की बात है कि सरकार किसानों को आजीविका सुनिश्चित करने की अपनी ज़िम्मेदारी निभाने से पीछे हट रही है।

(नोट: इस बीच हिन्दोस्तान के राष्ट्रपति ने इन विधेयकों को मंजूरी दे दी है और अब ये कानून बन गए है। लेकिन संघर्ष जारी है)।

किसान-विरोधी, समाज-विरोधी विधेयक मुर्दाबाद!

अधिकारों पर हमलों के ख़िलाफ़ मज़दूरों और किसानों की एकता जिंदाबाद!

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