मारूती-सुजुकी में प्रबंधन के खिलाफ़ संघर्ष जारी

11 अगस्त, 2011 को प्राप्त जानकारी के मुताबिक मारूती-सुजुकी के शीर्ष प्रबंधन के मजदूर-विरोधी रवैये, मजदूरों और उनके नेताओं को प्रताडि़त किये जाने के खिलाफ़ आने वाले सप्ताह में पांच प्लांटों के मजदूर अपने-अपने प्लांटों पर गेट सभाएं आयोजित करेंगे।

11 अगस्त, 2011 को प्राप्त जानकारी के मुताबिक मारूती-सुजुकी के शीर्ष प्रबंधन के मजदूर-विरोधी रवैये, मजदूरों और उनके नेताओं को प्रताडि़त किये जाने के खिलाफ़ आने वाले सप्ताह में पांच प्लांटों के मजदूर अपने-अपने प्लांटों पर गेट सभाएं आयोजित करेंगे।

ज्ञात रहे कि 27 जुलाई 2011 को मानेसर में स्थित मारूती-सुजुकी के प्लांट में कार्यरत यूनियन के 4नेताओं पर झूठे आरोप लगाकर प्रबंधन ने उन्हें निलंबित कर दिया। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने सुपरवाईजर पर हमला किया और काम में बाधा उत्पन्न कर रहे थे।

नेताओं को निलंबित किये जाने के बाद प्लांट में उपस्थित मजदूरों ने टूल डाउन कर दिया। प्रबंधन ने यह घोषणा की कि ‘बी’ और ‘सी’ शिफ्ट में उत्पादन नहीं होगा और प्रबंधन ने प्लांट के गेट पर ताला लगा दिया। प्रबंधकों ने मजदूरों को प्लांट तक लेकर आने वाली बस को रोक दिया। लेकिन इस सूचना के मिलने के बाद दोनों शिफ्टों में काम करने वाले मजदूरों ने किसी तरह प्लांट में पहुंचकर प्रबंधन के खिलाफ़ प्रदर्शन और नारेबाजी की। मजदूरों के गुस्से को देखकर प्रबंधन को मजदूरों से समझौता करना पड़ा। मजदूरों को उत्पादन करने की अनुमति दी गई लेकिन मजदूर नेताओं का निलंबन जारी रखा गया है।

मजदूर नेताओं ने बताया है कि प्रबंधन द्वारा इस पर बात करने के लिये एक सप्ताह का समय दिया गया था कि बात करके ही निलंबन वापस लेंगे।

विदित है कि मारूती-सुजुकी के मानेसर स्थित प्लांट में मजदूरों को प्रबंधन द्वारा घिनौने तरीके से प्रताडि़त करने का काम लगातार जारी है। मजदूरों ने प्रबंधकों की यूनियन के चुनाव का बहिष्कार किया था। यह सर्वविदित है कि यहां के मजदूरों ने अपनी यूनियन बनाने की मांग को लेकर जून के महीने में 13 दिन की हड़ताल की थी।

प्रबंधन बौखलाया हुआ है। वह मजदूरों को तंग करने के लिये अलग-अलग तरीके अपना रहा है। उनके साथ गाली-गलौज करना, उन्हें लगातार कई शिफ्टों में बिना छुट्टी लिये काम करने के लिये बाध्य करना, शिफ्ट इंचार्ज द्वारा मजदूरों की समस्याओं को न सुनना आदि तरीके से मजदूरों को लगातार तंग करने का काम जारी है।

एक मजदूर नेता ने बताया कि प्रबंधन ने मजदूरों को डराने-धमकाने के लिये किराये के हथियारबंद गुंडों को गेट पर तैनात कर दिया गया है तथा ये गुंडे प्लांट में खुलेआम घूमते हैं। मजदूरों पर दबाव बनाने के लिये पुलिस फोर्स भी बुलाई गई है।

मजदूर नेता ने बताया कि यदि बार-बार मजदूरों को प्रताडि़त किया जायेगा तो वे इसके खिलाफ़ संघर्ष में पीछे भी नहीं हटेंगे। उन्होंने बताया कि हर प्रकार के शोषण की शिकायत पर हरियाणा सरकार का श्रम विभाग चुप रहता है और कोई कार्यवाही नहीं करता है। यदि सरकार तथा श्रम विभाग प्रबंधन की तानाशाही के खिलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं करती है तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

मजदूर नेताओं ने बताया कि प्लांट में प्रबंधन के कुछ लोग जैसे कि मुकेश कुमार गुप्ता (उत्पादन विभाग का मुखिया) और अश्वनी कुमार देव (मानव संसाधन विभाग का मुखिया) की ठेकदारों के साथ मिलीभगत है। वे चाहते हैं कि मजदूर हड़ताल करें, ताकि उन्हें कंपनी में ठेकेदारी को बढ़ाने में मदद मिले और उनको इसका फायदा मिल सके। ठेके मजदूरों को पी.एफ., ईएसआई, वार्षिक छुट्टियां, आदि से वंचित रखा जाता है जो कि एक मजदूर का अधिकार है। कई बार प्रबंधन के लोग जानबूझकर गलतियां करते हैं और बाद में मजदूरों पर इसका दोष थोप दिया जाता है। इस प्रकार से मजदूरों को प्रताडि़त किया जा रहा है।

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