हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति की तीसरी परिपूर्ण सभा की विज्ञप्ति – 25 जुलाई, 2011

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति की तीसरी परिपूर्ण सभा की बैठक जुलाई 2011के तीसरे हफ़्ते में हुई।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति की तीसरी परिपूर्ण सभा की बैठक जुलाई 2011के तीसरे हफ़्ते में हुई।

परिपूर्ण सभा ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि अमरीका तथा यूरोप की मौजूदा हालातें इंगित करती हैं कि आने वाले समय में इन देशों का आर्थिक संकट और गहरा होने वाला है। इन हालातों का मतलब है कि साम्राज्यवादी अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं का और ज्यादा फौजीकरण करेंगे, और ज्यादा हमलावर युद्ध शुरू करेंगे तथा फासीवाद और श्रमिक जनता के खिलाफ़ हमले बढ़ाएंगे। परिपूर्ण सभा ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि इन देशों की श्रमजीवी जनता इन बढ़ते हमलों के खिलाफ़ लड़ रही है। संकट के लिए जो जि़म्मेदार हैं, उन बड़े बैंकों तथा कंपनियों को भुगतान देना सरकार को बंद करना चाहिए और श्रमिक जनता के कल्याण के लिए पैसा लगाना चाहिए, यह मांग हर संकटग्रस्त देश में ज्यादा से ज्यादा बुलंद की जा रही है।

विश्व स्तर की घटनाओं के आधार पर परिपूर्ण सभा ने विश्लेषण किया कि संकट से बाहर निकलने के लिए अमरीकी साम्राज्यवाद युद्ध की तैयारियां कर रहा है। तथाकथित “मानवतावादी आधार पर” और “वैश्विक सुरक्षितता को खतरा”, इस बहाने से अमरीका की अगुवाई में 27साम्राज्यवादी ताकतों के गठबंधन ने लिबिया के ऊपर जो जंगली हमला किया है, उसकी परिपूर्ण सभा ने निंदा की। उसने कहा कि लिबिया की प्रभुसत्ता का हनन पूरी तरह से अस्वीकार्य है। आत्म-निर्धारण एक असूल का मामला है और उसकी रक्षा करनी ही होगी।

सच्चाई तो यह है कि अमरीका से ही विश्व शांति को खतरा है। पाकिस्तान तथा अफ़गानिस्तान पर चालक विहीन विमानों से हमला करके वह खुल्लम-खुल्ला पाकिस्तान की प्रभुसत्ता पर अतिक्रमण कर रहा है, जिससे दक्षिण एशिया की शांति तथा सुरक्षा बड़े खतरे में है। परिपूर्ण सभा इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अपनी पार्टी को अपने देश के लोगों को इस खतरे के बारे में सचेत करना चाहिए तथा साम्राज्यवादी युद्ध के खिलाफ़ और पाकिस्तान की प्रभुसत्ता की हिफ़ाज़त में अपने देश में जनमत बनाना चाहिए।

परिपूर्ण सभा ने इस बात का विश्लेषण किया कि अमरीकी साम्राज्यवाद हिन्दोस्तान-पाकिस्तान के बीच शांति और एकता बिल्कुल नहीं चाहता, क्योंकि दोनों पड़ोसियों के बीच तनाव बनाये रखना, उसके हित में है। मुम्बई में 13जुलाई को जो बम धमाके हुए, वे ठीक ऐसे समय पर हुए जब हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के बीच बातचीत जारी थी। इससे स्पष्ट है कि इन धमाकों के पीछे कौन है।

हिन्दोस्तानी परिस्थिति का विश्लेषण करके परिपूर्ण सभा ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि एक के बाद एक घोटाले के पर्दाफाश से सत्ताधारी संप्रग सरकार की विश्वसनीयता का संकट बढ़ रहा है। बहुसंख्यक लोग दुखी हैं। सरकार के पूरे समर्थन से सबसे अमीर पूंजीपतियों

द्वारा देश के संसाधनों की लूट के प्रति लोग अपना गुस्सा दिखा रहे हैं। राजनैतिक तौर पर सबलीकरण की उनकी इच्छा कितनी गहरी है, यह इस बात से प्रतीत होता है कि वे मात्रा में बढ़ते अन्याय को सहने के लिए तैयार नहीं हैं और उन पर असर करने वाली नीतियों को निर्धारित करने में वे ज्यादा भूमिका की मांग उठा रहे हैं।

परिपूर्ण सभा ने साथियों को आह्वान किया कि अनेक मोर्चां पर जो संघर्ष जारी हैं, जैसे कि भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ़, कंपनियों द्वारा भूमि छीनने के खिलाफ़ और खाद्य अधिकार तथा रोजी-रोटी के अधिकार के लिए, उनके बारे में सबसे प्रगतिशील भूमिका पेश करने के लिए सैद्धांतिक काम करें। मांगों को कमज़ोर बनाने की और सरकार इन मांगों को क्यों पूरा नहीं कर सकती, इसके लिए बहाने बनाने की पूंजीपति वर्ग की कोशिशों का हमें पर्दाफाश करना चाहिए। हमें जन आंदोलनों में हिस्सा लेना चाहिए और लोगों के हाथों में प्रभुसत्ता लाने की दिश में राजनैतिक प्रक्रिया में क्रांतिकारी सुधार आगे लाना चाहिए।

परिपूर्ण सभा ने इस बात पर ग़ौर किया कि बढ़ती हुई महंगाई तथा सब क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमजीवियों का शोषण बढ़ाने की पूंजीपति वर्ग की कोशिशों के चलते मेहनतकश लोगों के खिलाफ़ आर्थिक हमले बढ़ रहे हैं। इन हमलों के खिलाफ़ संगठित मज़दूर वर्ग के कई तबके हाल ही में विरोध जताने के लिए आगे आये हैं। परिपूर्ण सभा ने सभी प्रदेशों में कार्यरत साथियों को आह्वान किया कि मज़दूर वर्ग के इन तबकों के संघर्षों का प्रचार करें तथा इनका सहयोग करें। इस संदर्भ में परिपूर्ण सभा ने साथियों को आह्वान किया कि वे इस सोच का त्याग करें कि सबसे गरीब तथा सबसे कम वेतन वाले मज़दूर सबसे ज्यादा क्रांतिकारी होते हैं।

पूंजीपति वर्ग के आक्रमण के खिलाफ़ संघर्ष तेज करने के लिए मज़दूर वर्ग के अग्रिम हिस्से को क्रांतिकारी दृष्टिकोण तथा सिद्धांत से लैस बनाने के काम में पार्टी के संचार माध्यम कितने महत्वपूर्ण हैं, इस बात पर परिपूर्ण सभा ने चर्चा की। मज़दूर वर्ग के अग्रिम हिस्से की चेतना बढ़ाने का काम हमें लगातार करते रहना चाहिए ताकि वह हमेशा के लिए संसदीय खेलों के झांसे से बाहर आये। बड़े पैमाने पर होने वाले उत्पादन तथा सेवाओं के क्षेत्र में काम करने वाले मज़दूरों के संघर्षों के बारे में अपनी समझ और गहरी बनाने के लिए इस क्षेत्र के मामलों की जांच का हमारा काम और बढ़ाने की ज़रूरत का परिपूर्ण सभा ने निर्देश किया। उनके संघर्षों पर प्रकाश डाल कर तथा पूंजीपति वर्ग के संचार माध्यमों द्वारा मज़दूर वर्ग के विरोध में किये गये प्रचार का पर्दाफाश करके यूनियन में संगठित मज़दूरों की राजनैतिक एकता स्थापित करने में पार्टी के संचार माध्यम, मुद्रित तथा वेब प्रकाशन, दोनों में सामथ्र्य है, इस बात पर परिपूर्ण सभा ने ग़ौर किया। इस दिशा में हम जो काम कर रहे हैं, उसे और बढ़ाना चाहिए।

परिपूर्ण सभा ने हर प्रादेशिक समिति को आह्वान किया कि अर्थव्यवस्था के अत्यावश्यक क्षेत्रों के श्रमजीवियों में कम्युनिज़्म के बुनियादी सेल बनाने का काम जारी रखें।

अपनी पार्टी के अनुभव ने जिस महत्वपूर्ण संगठनात्मक असूल की पुष्टि की है, उसको परिपूर्ण सभा ने दोहराया, कि बुनियादी संगठन ही वह जगह है जहां कम्युनिस्ट की भर्ती होती है और कम्युनिस्ट बतौर उसे तैयार किया जाता है। दीर्घकालीन समर्थकों को पार्टी का सदस्य बनाने में जो भी हिचकिचाहट है, उसे खत्म करना चाहिए। नये सदस्य बनाकर और उन्हें युनिटों में संगठित करके हमें अपनी संख्या बढ़ानी चाहिए, हमें नयी समितियां बनाने के लिए नयी जगहों पर जाना चाहिए।

सब पार्टी संगठनों को बांधना और मज़ब़ूत करना, यह अपने और काम के साथ-साथ लगातार चलना चाहिए। अपने काम का विस्तार करने के इस चरण पर यह नितान्त आवश्यक है कि सब पार्टी संगठनों को मज़बूत बनायें, उन्हें ज्यादा कार्यक्षम बनायें, हर तरह के उदारवाद का अंत करें, अपनी गंभीर कमजोरियों को खत्म करने के लिए आलोचना और आत्म-आलोचना लागू करें और सामूहिक निर्णयों को लागू करने के बारे में सख़्त हों।

परिपूर्ण सभा ने पार्टी साथियों को आह्वान किया कि महाअधिवेशन के दस्तावेज़ को देश के सब प्रदेशों के इंकलाबी समुदायों में फैलाएं।

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