सोवियत संघ के विघटन के 30 साल बाद:
समाजवाद ही पूंजीवाद का एकमात्र वास्तविक विकल्प है

रूस में हुई 1917 की अक्तूबर क्रांति के फलस्वरूप, सोवियत संघ के जन्म के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्थिति में एक गुणात्मक परिवर्तन आया। उस क्रांति ने जिस नए सोवियत राज्य और समाजवादी व्यवस्था की हिफ़ाज़त की वह पूरी दुनिया के लोगों के लिए एक तमन्ना और प्रेरणा का स्रोत बन गई। मज़दूर वर्ग का एजेंडा ही राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र-बिंदु बन गया। पूंजीपति वर्ग के प्रवक्ताओं को भी यह दिखावा करना पड़ा कि वे किसी न किसी प्रकार के समाजवाद के पक्षधर हैं।

आगे पढ़ें


जम्मू व कश्मीर में बिजली क्षेत्र के मज़दूरों ने अपने संघर्ष में जीत हासिल की

जम्मू और कश्मीर में बिजली क्षेत्र के हड़ताली मज़दूरों ने 21 दिसंबर, 2021 को कड़े संघर्ष से हासिल जीत का जश्न मनाया। उन्होंने 17 दिसंबर की मध्यरात्रि से काम के बहिष्कार का आह्वान किया था, जब सरकार ने इस केंद्र शासित प्रदेश में बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में उठाए गए क़दम को रोकने की उनकी मांग को पूरा

आगे पढ़ें

हिन्दोस्तानी गणराज्य की 72 वीं सालगिरह के अवसर पर :
हिन्दोस्तानी गणराज्य को नई बुनियादों पर पुनर्गठित करने की ज़रूरत है

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 17 जनवरी, 2022

26 जनवरी हिन्दोस्तान के गणराज्य घोषित किये जाने की 72 वीं सालगिरह है। 1950 में इस दिन पर संविधान सभा द्वारा अपनाया गया संविधान लागू हुआ था। इससे पहले, 1935 के पुराने उपनिवेशवादी भारत सरकार अधिनियम को देश के मूल कानून के रूप में माना जाता था। 26 जनवरी, 1950 को, उसकी जगह पर, नया संविधान देश का मूल क़ानून बन गया। इससे पहले हिन्दोस्तान एक संवैधानिक राजशाही हुआ करता था, जिस राज्य का प्रधान महाराज जॉर्ज-6 हुआ करते थे। 26 जनवरी, 1950 को हिन्दोस्तान एक गणराज्य में बदल गया, जिस राज्य के प्रधान एक राष्ट्रपति बन गए।

आगे पढ़ें


रेजिडेंट डॉक्टरों की दुर्दशा दिखाती है कि राज्य को लोगों के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है

2021 का साल दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित पूरे हिन्दोस्तान में रेजिडेंट डॉक्टरों की एक बड़ी हड़ताल के साथ समाप्त हुआ। रेजिडेंट डॉक्टरों को हर समय अस्पतालों में मरीजों की देखभाल करने की बड़ी ज़िम्मेदारी निभानी पड़ती है। लेकिन कोरोना की महामारी के समय में संक्रमित मरीजों की देखभाल करने का बोझ उन पर कई गुना बढ़ गया है।

आगे पढ़ें


हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह की ओर से नए साल का अभिवादन

साथियों,

वर्ष 2021 समाप्त हो गया है। यह देशभर में करोड़ों-करोड़ों मज़दूरों और किसानों के बहादुर और दृढ़ संघर्ष का वर्ष था।

आगे पढ़ें


हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की 41वीं सालगिरह उत्साहपूर्वक मनाई गई

25 दिसम्बर, 2021 के दिन हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की स्थापना की 41वीं सालगिरह थी। इस खुशी के मौके को हिन्दोस्तान में और विदेश में पार्टी के संगठनों ने सभाएं आयोजित कीं। दिल्ली, मुंबई, टोरोंटो और अन्य स्थानों पर सभाएं आयोजित की गयीं।

आगे पढ़ें


भारतीय रेलवेस टेक्निकल सुपरवायसर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव के साथ साक्षात्कार

मजदूर एकता लहर (म.ए.ल.) भारतीय रेलवे में कई श्रेणी-वार एसोसिएशनों के नेताओं के साथ जैसे कि रेल चालकों, गार्डों, ट्रेन नियंत्रकों, सिग्नल और रखरखाव कर्मचारियों, रेल की पटरियों के अनुरक्षकों, पॉइंटमैन, आदि के साक्षात्कार कर रही है और छापती रही है। इस श्रृंखला के आठवें भाग में भारतीय रेलवेस टेक्निकल सुपरवायसर्स एसोसिएशन (आई.आर.टी.एस.ए.) के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव के. वी. रमेश (के.वी.आर.) का साक्षात्कार हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं।

आगे पढ़ें
240_Anganwari workers in Odisha protest

वर्ष 2021 में मज़दूरों के संघर्षों की एक झलक:
शासक वर्ग के समाज-विरोधी घिनौने हमलों का मज़दूरों द्वारा विरोध बढ़ा

वर्ष 2021 में मज़दूरों द्वारा अपनी रोज़ी-रोटी और अधिकारों की हिफ़ाजत में और अपने ऊपर बढ़ते शोषण के ख़िलाफ़ किये गये कई जुझारू संघर्ष देखे गए।

आगे पढ़ें
Foxconn_5_240


फॉक्सकॉन के मज़दूरों ने चेन्नई बेंगलूरू महामार्ग को रोका

तमिलनाडु के श्री पेरंबदुर में बहुराष्ट्रीय कंपनी फॉक्सकॉन के हजारों मज़दूरों ने 17-18 दिसंबर का्र ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन और हड़ताल की। विरोध प्रदर्शन के कारण चेन्नई बेंगलूरू महामार्ग पर 18 घंटे से भी अधिक समय तक के लिये यातायात ठप्प रहा। इस विरोध प्रदर्शन ने तमिलनाडु सरकार को मज़दूरों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों को दूर करने के लिए तत्काल क़दम उठाने का वादा करने के लिए मजबूर कर दिया। मज़दूर एकता लहर को इस विरोध प्रदर्शन पर थोझिलर ओट्रुमई इयक्कम (मज़दूर एकता आंदोलन) की ओर से रिपोर्ट मिली है।

आगे पढ़ें


1971 के युद्ध में हिन्दोस्तान की भूमिका पर

16 दिसंबर, 2021 को हिन्दोस्तानी शासकों ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ युद्ध में भारतीय सैनिकों की जीत के 50 साल पूरे होने पर “स्वर्णिम विजय दिवस” मनाया। इस युद्ध के परिणामस्वरूप बांग्लादेश का जन्म हुआ था। प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर मुख्य समारोह में भाग लिया, जहां उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों की बहादुरी और बलिदान को याद किया। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, ढाका में स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए।

आगे पढ़ें